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रुड़की में हुए कवि सम्मेलन व ऑल इंडिया मुशायरा में कवियों व शायरों ने खूब लूटी वाहवाही,पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत रहे मौजूद

ByIsrar

Feb 24, 2024

] Imran Deshbhakt: रुड़की।अंजुमन इतरका-ए-अदब रुड़की की ओर से नेहरू स्टेडियम में ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया,जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मौजूद रहे।कवि सम्मेलन व मुशायरा का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा फीता काटकर किया गया।अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कवि सम्मेलन व मुशायरा आपसी भाईचारे का प्रतीक है तथा यह हमारी गंगा,जमुनी तहजीब का भी हिस्सा है।उन्होंने कहा कि शिक्षा नगरी के रूप में विख्यात रुड़की नगर बुद्धिजीवियों का नगर है।इस तरह के सम्मेलनों से प्रदेश में ही नहीं,बल्कि पूरे देश में एकता,भाईचारे और सद्भाव की बयार बहेगी।विशिष्ट अतिथि के रूप में जीएसटी कमिश्नर विजय कुमार,कांग्रेस प्रदेश महामंत्री सचिन गुप्ता,वीरेंद्र रावत,पूर्व मंत्री अय्याज अहमद,राव आफाक अली,ईश्वरलाल शास्त्री व समाजसेवी आदिल फरीदी मौजूद रहे।कवि सम्मेलन व मुशायरा के संरक्षक एवं कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री सचिन गुप्ता ने आए सभी अतिथियों एवं कवियों व शायरों का सम्मान किया।संचालन संस्था के महासचिव एवं हास्य कवि सिकन्दर हयात गडबड ने किया।देश के जाने-माने शायर नदीम फारूक की शान में हुए इस मुशायरा व कवि सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा उन्हें शहंशाह एवार्ड व पगड़ी पहनकर तथा स्मृति चिन्ह से नवाजा गया।अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी इंजीनियर मुजीब मलिक ने की।अंतर्राष्ट्रीय शायर सिकन्दर हयात गडबड ने मुशायरा के संयोजक सचिन गुप्ता का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि उनकी कर सरपरस्ती में ही रुड़की में विशाल कार्यक्रम संभव हो पाया।संस्था उनका सदैव आभारी रहेगी।
प्रसिद्ध शायरा सबीना अदीब ने अपने कलाम से श्रोताओं को नवाजते हुए पढ़ा कि…..
अपनी डाली से बिछड़े अलग हो गए।
पेड़ के सारे पत्ते अलग हो गए।।
ईश्वर भी वही है खुदा भी वही।
जाने क्यों उसके बंदे अलग हो गए।।
प्रसिद्ध शायर अल्ताफ जिया ने अपने कलामात से श्रोताओं को कुछ इस तरह नवाजा कि…..
खुद पर ही बार कर लिया खुद को।
इतना खुद्दार कर लिया खुद को।।
शायर डॉक्टर सबा बलरामपुरी ने पढ़ा कि…..
मेरा है सबा कहना ये इश्क भी तोहफा है।
दौलत से कभी इसको तोला नहीं जाता है।।
खामोश निगाहों से बस देख रही हूं मैं।
कहते हैं इबादत में बोला नहीं जाता है।।
हाशिम फिरोजाबादी के कलामात को श्रोताओं ने बेहद सराहा,उन्होंने पढ़ा कि…..
हमें तो खुद से भी मिलना मुहाल होता है।
तुम्हें तो हम बड़ी आसानी से मिल गए हैं।।
बिलाल सहारनपुरी की शायरी को भी श्रोताओं ने खूब सराहा…..
रिक्शा चलाने वाले ने बच्चे पढ़ा लिए।
जो थे नवाबजादे नजाकत में मर गए।।
मशहूर शायर खुर्शीद हैदर ने अपने कलाम से नमाजते हुए पढ़ा कि…..
मेरी जानी मोहब्बत से ना देखो।
मोहब्बत पर जवाल आया हुआ है।।
कवि सम्मेलन व मुशायरा में मिशन गोपालपुरी,साहिल माधोपुरी,हसनैन दिलकश,विजय द्रो आदि ने भी अपने-अपने कलामों से देर रात तक वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष सैयद सनाउल हक,दिलशाद खान,मोहम्मद जाकिर,मास्टर शमसुद्दीन  सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।

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